स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)

पूर्व में संचालित निर्मल भारत अभियान के स्थान पर 02 अक्टुबर 2014 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरूआत की गर्इ है जिसका उददेश्य देश की सभी ग्राम पंचायतों को 02 अक्टुबर 2019 तक खुले में शौच मुक्त का लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन स्तर में स्वच्छता के माध्यम से सुधार लाना, सूचना शिक्षा एवं संचार (आर्इ.र्इ.सी.) के माध्यम से स्थायी स्वच्छता सुविधाओं का बढ़ावा देने वाले समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करना, छात्रों के बीच स्वास्थ्य शिक्षा और साफ सफार्इ की आदतों को बढ़ावा देना, सुरक्षित और स्थायी स्वच्छता के लिए किफायती तथा उपयुक्त तकनीकी को बढ़ावा देना तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट का उचित प्रबंधन सुनिशिचत करना इस योजना का मुख्य उददेश्य है।

जल, जनित बीमारियां कुल बीमारी में से 90 प्रतिशत है। जल जनित बीमारी का कारण जल का दूषित होना जो कि पैथौजन जिसका वाहक अवयव मानव मल होता है, जिसका सुरक्षित निपटान आवश्यक है। इसी उद्देश्य के लिये 1986 में केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम की शुरूआत भारत सरकार द्वारा की गर्इ थी, जिसमें केवल बीपीएल पारिवारिक शौचालयों का निर्माण ही समिमलित था। इस कार्यक्रम में प्राप्त अनुभवों के आधार पर 1999 में भारत सरकार द्वारा स्वच्छता के सभी घटकों का समावेश करते हुए एक नया कार्यक्रम ''सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान को आरम्भ किया गया। 01 अप्रैल 2012 से इस कार्यक्रम में यथोचित बदलाव किये गए थे एवं इसे ''निर्मल भारत अभियान'' के नाम से सभी राज्यों में कि्रयानिवत किया जा रहा था।

माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा दिनांक 15 अगस्त 2014 को स्वतंत्रता दिवस के दिन की गर्इ घोषणा के आधार पर 02 अक्टूबर 2014 से निर्मल भारत अभियान का नाम परिवर्तित कर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) रखा गया है।

योजना के मापदण्ड :-

पूर्व में संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सिर्फ बी.पी.एल. परिवारों को ही पारिवारिक शौचालय निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि की पात्रता थी। किन्तु 1 अपै्रल 2012 से प्रारंभ निर्मल भारत अभियान के अंतर्गत समस्त बी.पी.एल. परिवारों के अतिरिक्त निम्न चिनिहत 6 प्रकार के ए.पी.एल. परिवारों को भी व्यकितगत पारिवारिक शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि की पात्रता है :-

• अनुसूचित जाति

• अनुसूचित जनजाति के परिवार।

• लघु एवं सीमान्त कृषक।

• भूमिहीन मजदूर।

• शारीरिक रूप से अक्षम ।

• महिला मुखिया वाले परिवार।

ऐसी पंचायतें जहां नलजल योजना संचालित है, को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध रूप से खुले से शौच से मुक्त करने हेतु शौचालय निर्माण किया जाता है। इसी प्रकार निर्मल ग्राम पुरस्कार से सम्मानित ग्राम पंचायतों में नलजल प्रदाय योजना के कि्रयान्वयन की प्राथमिकता निर्धारित है। इसी प्रकार अभियान में मनरेगा के अभिसरण को समिमलित किया गया है। वर्तमान में मनरेगा से अभिसरण के स्थान पर संपूर्ण शौचालय मनरेगा या स्वच्छ भारत मिशन से ही बनाये जायेंगे। ग्राम पंचायत के अंतर्गत शासकीय शालाओं एवं अांगनबाड़ी केन्द्रों में स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिए स्वच्छ व सुरक्षित शौचालय निर्माण का प्रावधान है। वर्तमान के शाला भवनों एवं आंगनबाड़ी भवनों में शौचालय का कार्य संबंधित विभाग द्वारा किया जा रहा है। गांव में जन जागरूकता के द्वारा घरेलू व्यकितगत शौचालय के निर्माण एवं उपयोग सुनिशिचत कराने पर प्रोत्साहनकर्ता यथा, महिला स्वसहायता समूह, स्वच्छता दूत, आशा कार्यकर्ता (मितानिन) इत्यादि को प्रोत्साहन राशि रूपये 75- प्रति शौचालय की दर से प्रदान किये जाने का भी प्रावधान है। वर्तमान में यह प्रोत्साहन राशि रू. 150 तक कर दी गर्इ है।

For more information visit: sbm.gov.in/