महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना:-

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत परिवारों की आजिविका को सुरक्षा प्रदान करने हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारटी अधिनियम 2005, दिनांक 07 सितम्बर 2005 को जारी की गर्इ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी अधिनियम 2005 की धारा 4 (1) अंतर्गत राज्य में 2 फरवरी 2006 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना छत्तीसगढ़ में प्रारंभ की गर्इ। छत्तीसगढ़ में 02 फरवरी 2006 से प्रथम चरण में 11 जिले (बस्तर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, जशपुर, कांकेर, कबीरधाम, कोरिया,रायगढ़, राजनांदगांव एवं सरगुजा), द्वितीय चरण में दिनांक 01 अप्रैल 2007 से चार जिले (रायपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा एवं महासमुंद) तथा तृतीय चरण में दिनांक 01 अप्रैल 2008 से राज्य के समस्त जिलों में योजना प्रभावशील है।

उददेश्य :-

(1) अधिनियम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिवस का, व्यस्क सदस्यों को अकुशल मानव श्रम रोजगार सुनिशिचत करना एवं स्थायी परिसम्पतितयों का सृजन करना।

(2) छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत 100 दिवस से बढ़ाकर 150 दिवस रोजगार प्रदाय किया जा रहा है। अतिरिक्त 50 दिवस पर होने वाला व्यय राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।

(3)किसी भी ऐसे ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य जो अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार है उनके द्वारा आवेदन किये जाने के 15 दिवस के भीतर रोजगार मुहैया कराये जाने की गारंटी लागू होती है।

(4)काम की मांग करने वाले आवेदक को 15 दिवस के भीतर कार्य उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है। बेरोजगारी भत्ता प्रथम 30 दिवस हेतु न्यूनतम मजदूरी दर का एक चौथार्इ होता है एवं 30 दिवस के उपरांत न्यूनतम मजदूरी दर का आधा होता है। इस हेतु राज्य द्वारा ष्महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार बेरोजगारी भत्ता नियम-2013ष् का छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशन किया गया है।

(5) योजना के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान बैंकडाकघर के बचत खातों के माध्यम से किया जाता है। भारत सरकार द्वारा राज्य के प्।च् जिलों में आवश्यकता पड़ने पर नगद मजदूरी भुगतान करने की अनुमति प्रदान की गर्इ है।

(6)योजनांतर्गत वर्तमान में रू0 157- प्रति दिवस मजदूरी दर भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है।

(7) योजनांतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर मजदूरी एवं सामग्री का 60रू40 के अनुपात में राशि व्यय का प्रावधान है।

पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व :-

(1) भारत सरकार के निर्देशानुसार पारदर्शिता सुनिशिचत करने हेतु राज्य में पृथक से सामाजिक अंकेक्षण इकार्इ का गठन किया गया है।

(2) महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्राप्त शिकायतों का निराकरण हेतु ''छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गांरटी शिकायत निवारण नियम, 2012'' का छत्तीसगढ़ राजपत्र में 11 मर्इ 2012 को प्रकाशन किया गया है।

(3) शिकायतों के तत्काल निपटारे के लिये राज्य एवं जिला स्तर पर हेल्प लार्इन टोल फ्री नम्बर की व्यवस्था की गर्इ है।

(4) योजनांतर्गत प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु राज्य द्वारा http://mgnrega.cg.gov.in/ मे आनलार्इन व्यवस्था की गर्इ है।

(5) पारदर्शिता तथा Realtime MIS अधतन करने के उददेश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के कायोर्ं हेतु पूरे राज्य में e-Muster Roll का प्रयोग किया जा रहा है।

(6) महात्मा गांधी नरेगा की धारा 27 के तहत योजना क्रियान्वयन से संंबंधित शिकायतों के निवारण (निपटारे) के लिए जिला स्तर पर योजनांतर्गत 17 लोकपाल की नियुकित की व्यवस्था की गर्इ है, राज्य के 27 जिलों का 17 प्रादेशिक क्षेत्र बनाया गया है। वर्तमान में 15 लोकपाल कार्यरत है।

(7) जिलों के लोकपाल द्वारा पारित अवार्ड के विरूद्ध सुनवार्इ हेतु राज्य स्तर पर त्रिसदस्यीय अपीलिय प्राधिकारण गठन की कार्यवाही प्रकि्रयाधीन है।

गुणवत्ता नियंत्रण :-

योजनांतर्गत संपादित किये जा रहे कायोर्ं की गुणवत्ता के मूल्यांकन हेतु राज्य स्तर से 17 SQM की नियुकित की गर्इ है। मजदूरी भुगतान में विलंब को कम करने के उददेश्य से e-FMS प्रणाली प्रारंभ की गर्इ है। वर्तमान में व्यवसायिक तथा ग्रामीण बैंक के खाताधारियों हेतु e-FMS प्रणाली का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। शीघ्र ही योजना के समस्त भुगतान e-FMS से किये जाने का लक्ष्य है।