ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान का शिलान्यास 24.10.2001 को किया गया। निमोरा सिथत नवनिर्मित भवन परिसर का उदघाटन भारत के माननीय प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा 30 अप्रैल 2005 को किया गया। राज्य शासन द्वारा 17 जनवरी 2011 में संस्थान को ''छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 के अंतर्गत स्वायत्तशासी संस्था के रूप में घोषित किया है, तदनुसार संस्थान का पंजीयन दिनांक 26.02.2011 को हुआ।

दृषिट (विजन) :-

स्थानीय शासन के सभी स्तरों के नव-निर्वाचित जन प्रतिनिधियों, लोक-सेवकों एवं नागर सामाज संगठनों के प्रतिनिधियों की विकसित क्षमता, जिससे अधिकतम सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ के लिए संसाधनों का प्रबंधन करते हुए समावेशी एवं संवहनीय विकास तथा सुशासन सुनिशिचत कराना।

मिषन :-

''समावेषी विकास हेतु नये उपयोगी ज्ञान का आदान-प्रदान"

समावेशी एवं संवहनीय विकास के लिए नये उपयोगी ज्ञान का सृजन एवं प्रसार करते हुए, संस्थान एक विश्वस्तरीय उत्कृष्ट ज्ञान संस्था के रूप में विकसित होना चाहता है, ताकि संस्थान, छत्तीसगढ़ तथा भारत के अन्य राज्यों में ग्रामीण विकास एवं स्थानीय शासन में सुधार हेतु मार्गदर्शन की योग्यता प्राप्त कर सके।

संस्थान का उददेश्य :-

(1) स्थानीय शासन, ग्रामीण विकास एवं नगरीय विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षण, शिक्षण, शोध एवं सलाह देने के लिए शीर्ष संस्थान के रूप में कार्य करना।

(2) स्थानीय शासन में सुधार लाने तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लिए आदर्श योजना निर्माण करने एवं क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करना।

(3) निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों, शासकीय सेवकों तथा लोक-सेवी संस्थाओं के स्थानीय शासन तथा ग्रामीण विकास से जुडे प्रतिनिधियों की क्षमता का विकास करना।

(4) विधालयोंकेन्द्रों की स्थापना करना जिससे (अ) अध्ययन एवं उन्मुखीकरण (ब) प्रशिक्षण एवं सलाह (स) शोध एवं मुल्यांकन (द) विस्तार एवं अन्य ऐसे कार्य किये जा सकें जो संस्थान के उददेश्यों की प्रापित के लिए आवश्यक हंै।

(5) छत्तीसगढ़ शासन की सलाह से भारत अथवा विदेशों में सिथत सामान्य उददेश्यों में रूचि रखने वाले अन्य संस्थाओं, संघों तथा समितियों से सहयोग प्राप्त करना।

(6) विभिन्न संस्थाओं के बीच अन्त:संबंध विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे ग्रामीण विकास एवं स्थानीय सुशासन के संदर्भ में जानकारियों का आदान-प्रदान एवं ज्ञान का प्रबंधन हो सके।

(7) विश्वविधालयों के सहयोेग से संस्थान में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री एवं अन्य विधोपार्जन विशिष्टता स्थापित करना।

(8) परीक्षाएँ आयोजित कराना एवं ऐसे व्यकितयों को सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री एवं अन्य विधोपार्जन विशिष्टता प्रदान करना, जिन्होंने :-

अ संस्थान द्वारा अनुमोदित पाठयक्रम के लिए विहित परीक्षा उत्तीर्ण की हो अथवा जब तक कि केन्द्र द्वारा विहित रीति से नियमों के तहत उन्हें परीक्षा में छूट प्रदान न की गर्इ हो, अथवा,

ब विहित शतोर्ं के अनुरूप अनुसंधान कार्य किया हो।

(9) शिक्षावृतित, छात्रवृतित, वृतित एवं पुरस्कारों को स्थापित करना तथा प्रदान करना।

(10) पुस्ताकालय एवं सूचना सेवाओं की स्थापना तथा संचालन करना।

(11) उपयर्ुक्त उददेश्यों को बढ़ावा देने के लिए पुस्तकों, पुसितकाओं, पत्रिकाओं एवं शोध पत्रों का प्रकाशन करना।

(12) उन सभी गतिविधियों को संचालित करना जो उपरोक्त उददेश्यों की प्रापित के लिए सहायक अथवा आवश्यक है, तथा जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहन मिल सके।

संस्थान में उपलब्ध संसाधन :-

ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में प्रशासनिक भवन, व्याख्यान कक्ष, ग्रंथालय, कम्प्यूटर लैब, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मनोरंजन हेतु पे्रक्षागृह में सुसजिजत रंगमंच,स्वास्थ्य वर्धन हेतु जिम्नेजियम, सेटेलार्इट के माध्यम से राज्य के 115 केेन्द्रों में प्रशिक्षण देने हेतु राज्य पंचायत संसाधन केन्द्र, पुरूष एवं महिला प्रशिक्षार्थियों के लिए अलग-अलग छात्रावास, अतिथि वक्ताओं के ठहरने के लिए स्वामी आत्मानंद, अतिथिगृह का निर्माण किया गया है। संस्थान में प्रशिक्षार्थियों के अध्ययन भ्रमण आदि हेतु एक 32 सीटर मिनी बस की सुविधा भी उपलब्ध है।